Allahabad HC: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, बोलने की आज़ादी का ये कतई मतलब नहीं कि प्रधानमंत्री और मंत्रियों को दी जाये गालियां

न्यूज डेस्क (प्रियंवदा गोप): इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad HC) ने जौनपुर (Jaunpur) के मुमताज मंसूरी (Mumtaz Mansoori) के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार करते हुए कहा कि “संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मान्यता देता है लेकिन ये अधिकार नहीं कि पीएम और अन्य मंत्रियों के गाली दी जाये।” बता दे कि मंसूरी पर सोशल मीडिया पर पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और अन्य मंत्रियों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने का मामला दर्ज किया गया था।

मंसूरी की याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार (Justice Ashwini Kumar Mishra and Justice Rajendra Kumar) की न्यायिक खंडपीठ ने कहा कि, “हालांकि इस देश का संविधान प्रत्येक नागरिक के साथ बोलने की स्वतंत्रता की आज़ादी देता है लेकिन ऐसा अधिकार नहीं देता कि नागरिक किसी को भी गाली दे या अपमानजनक टिप्पणी करें। खासतौर से पीएम या भारत सरकार (Indian government) के अन्य मंत्रियों के खिलाफ”

साल 2020 में दर्ज एफआईआर में ये आरोप लगाया गया था कि मंसूरी ने मोदी, शाह और अन्य केंद्रीय मंत्रियों के खिलाफ अत्यधिक अपमानजनक टिप्पणी की थी। उस पर आईपीसी की धारा 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान) और आईटी अधिनियम (IT Act) की धारा 67 (इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री को प्रकाशित या प्रसारित करने की सजा) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

इसके बाद मंसूरी के खिलाफ मीरगंज थाने (Mirganj Police Station) में आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। प्राथमिकी को चुनौती देते हुए मंसूरी ने इसे रद्द करने के लिये उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

हालांकि एफआईआर को रद्द करने से इनकार करते हुए कोर्ट ने 15 जुलाई को रिट याचिका को खारिज कर दिया, ये देखते हुए कि एफआईआर साफतौर से संज्ञेय अपराध को अंजाम देने का खुलासा करती है। इस तरह की याचिका को रद्द करने की प्रार्थना के साथ दायर मौजूदा रिट याचिका में दखल देने का कोई ठोस आधार नहीं मिलता है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को कानून के अनुसार मामले में आगे बढ़ने और जल्द से जल्द जांच खत्म करने की आज़ादी होगी।

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