बीते गुरूवार (3 जनवरी 2022) को भारत ने गलवान मुद्दे पर चीन को उसी भाषा में जवाब देने का फैसला किया, जिसे बीजिंग बखूबी समझता है। भारत सरकार ने बीजिंग में होने वाले शीतकालीन ओलंपिक (China’s Winter Olympics) का राजनयिक बहिष्कार (Diplomatic Boycott) करने का फैसला किया, जिसके तहत नई दिल्ली इन खेलों के उद्घाटन समारोह में अपने राजदूत को नहीं भेजेगी। इसके अलावा, नेशनल ब्राडकास्टर दूरदर्शन का स्पोर्ट्स चैनल भी भारत में इसे कवर नहीं करेगा।
ये कदम तब उठाया गया जब चीन ने गलवान में तैनात अपने रेजिमेंट कमांडर क्यूई फैबाओ (Regiment Commander Qi Faibao) को ओलंपिक के लिये मशाल वाहक बनाया। ये वही कमांडर है, जिसने गलवान में हमारे जवानों पर गुपचुप तरीके से हमला किया था। भारत सरकार ने इसे बेहद गंभीरता से लिया है और चीन को उसी की भाषा में मुहंतोड़ जवाब दिया।
भारत सरकार का ये कदम इसलिए भी काबिले तारीफ है क्योंकि शीतकालीन ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, मिस्र के राष्ट्रपति, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (Saudi Arabia’s Crown Prince Mohammed bin Salman) और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान मौजूद रहेंगे।
चीन गलवान में घायल हुए अपने कायर सैनिक को युद्ध नायक कहता है और दावा करता है कि हिंसक सैन्य झड़प (Violent Military Clashes) में उसके सिर्फ चार सैनिक ही मारे गये। लेकिन इस झड़प के कुछ देर बाद सामने आया कि इस सैन्य तनाव में चार नहीं बल्कि 40 से ज़्यादा चीनी सैनिक मारे गये थे। और अब एक ऑस्ट्रेलियाई अखबार (Australian Newspaper) ने भी इसकी पुष्टि की है। इस अखबार में गलवान घाटी में हुई हिंसा पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें पांच बड़ी बातों का जिक्र किया गया है।
सबसे पहले इस हिंसक झड़प में 4 नहीं बल्कि 42 चीनी सैनिक मारे गये। दूसरा संघर्ष के दौरान गलवान नदी (Galwan River) में गिरने से इनमें से 38 सैनिक मारे गये। फरवरी 2021 में चीन ने कहा कि हिंसा के दौरान नदी में डूबने से उसके सिर्फ एक ही सैनिक की मौत हुई। लड़ते-लड़ते तीन जवान शहीद हो गये। लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि उस दिन गलवान नदी में झड़प के दौरान कम से कम 38 चीनी सैनिक बह गये थे।
तीसरा ये रिपोर्ट कहती है कि दोनों देशों के बीच हिंसक संघर्ष की स्थिति इसलिये बनी क्योंकि चीनी सेना द्वारा दो प्रोटोकॉल्स का साफतौर पर उल्लंघन किया गया था। सबसे पहले उसने सीमा पर बफर जोन (Buffer Zone) में अवैध टेंट लगाने की कोशिश की और दूसरी बात उसने सीमा समझौते के खिलाफ इलाके में अवैध निर्माण को अंजाम दिया और जानबूझकर भारतीय सेना (Indian Army) को उकसाया।
इसने ये भी कहा गया कि चीन ने 5 जून 2020 को कमांडर स्तर की वार्ता में रज़ामंदी ज़ाहिर की थी कि वो बफर जोन से अपनी सेना और अपने तंबू वापस ले लेगा। बफर जोन सीमा पर वो इलाका है जहां दोनों देशों की सेनायें गश्त कर सकती हैं, लेकिन वहां कोई शिविर या हथियार तैनात नहीं किया जा सकता है।
चौथा ये हिंसक झड़प पूरी तरह से सुनियोजित थी, यानि चीन ने पहले से ही पूरी योजना तैयार कर ली थी। और इसके कुछ सबूत भी इस रिपोर्ट में पेश किये गये हैं। चीन ने झड़प के बाद जून 2020 में हुई घटना के दो वीडियो जारी किये थे, जिनमें से एक वीडियो दिन का और दूसरा रात का है। इनमें से एक वीडियो में वो सिपाही भी दिख रहा है, जिसे उसने शीतकालीन ओलंपिक खेलों में मशालवाहक बनाया गया है।
इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चीन ने जिन वीडियोज को 15 जून का बताया है, वे 6 जून के हैं. इन वीडियो में भारत के जवान बिना बॉडी गियर के नजर आ रहे हैं। चीनी सैनिकों ने युद्ध के लिये गर्दन को ढकने वाले हेलमेट और बॉडी आर्मर (Body Armor) पहने हुए थे। यानि चीनी सैनिक इस झड़प के लिये तैयार होकर आये थे। हालांकि इस तैयारी के बावजूद भारतीय सेना ने अपने 40 से ज्यादा चीनी सैनिकों को मार गिराया और इस संघर्ष में चीन को भारी नुकसान हुआ।
और आखिरी में चीन में हुई इस हिंसा से जुड़ी तमाम जानकारियों को प्रकाशित किये जाने पर कड़ी निगरानी की गयी। और अगर कोई चीनी पत्रकार या कोई और इसके बारे में कुछ लिखता है तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाता है। इससे पता चलता है कि चीन नहीं चाहता कि दुनिया इस संघर्ष की सच्चाई जाने। चीन के इन खेलों का भारत के अलावा आस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन भी राजनयिक बहिष्कार (Diplomatic Boycott) रहे है। यानि की चीन भले ही इन खेलों को आयोजित करने जा रहा है लेकिन इसके साथ ही उसे बड़े राजनयिक खेला से दो चार होना पड़ रहा है।